तुमसे लागी लगन - जैन भजन

तुम से लागी लगन, ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा ||

निशदिन तुमको जपूँ, पर से नेह तजूँ, जीवन सारा,
तेरे चरणों में बीत हमारा ||टेक||

अश्वसेन के राजदुलारे, वामा देवी के सुत प्राण प्यारे||
सबसे नेह तोड़ा, जग से मुँह को मोड़ा, संयम धारा ||
मेटो मेटो जी संकट हमारा ||

इंद्र और धरणेन्द्र भी आए, देवी पद्मावती मंगल गाए ||
आशा पूरो सदा, दुःख नहीं पावे कदा, सेवक थारा ||
मेटो मेटो जी संकट हमारा ||

जग के दुःख की तो परवाह नहीं है,
स्वर्ग सुख की भी चाह नहीं है||
मेटो जामन मरण, होवे ऐसा यतन, पारस प्यारा ||
मेटो मेटो जी संकट हमारा ||

   

लाखों बार तुम्हें शीश नवाऊँ,जग के नाथ तुम्हें कैसे पाऊँ ||पंकज व्याकुल भया, दर्शन बिन ये जिया लागे खारा ||      मेटो मेटो जी संकट हमारा ||

तुम से लागी लगन,
ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा ||

Prabhu Patit Pawan

 

प्रभु पतित पावन मैं अपावन, चरण आयो शरण जी।

यों विरद आप निहार स्वामी, मेट जामन मरण जी॥

तुम ना पिछान्यो आन मान्यो, देव विविध प्रकार जी।

या बुद्धि सेती निज न जान्यो, भ्रम गिन्यो हितकार जी॥

भव-विकट-वन में कर्म बैरी, ज्ञान धन मेरो हर्यो।

सब इष्ट भूल्यो भ्रष्ट होय, अनिष्ट गति धरतो फिर्यो॥

धन घड़ी यों धन दिवस यों ही, धन जनम मेरो भयो।

अब भाग्य मेरो उदय आयो, दरश प्रभु को लख लयो॥

छवि वीतरागी नग्नमुद्रा, दृष्टि-नासा पै धरैं।

वसु प्रातिहार्य अनन्त गुण-युत कोटि रवि छवि को हरैं॥

मिट गयो तिमिर मिथ्यात्व मेरो, उदय रवि आतम भयो।

मो उर हरष ऐसो भयो, मनु रंक चिंतामणि लयो॥

दोऊ हाथ जोड़ नवाऊँ मस्तक, वीनऊँ तुम चरण जी।

सर्वोत्कृष्ट त्रिलोकपति जिन, सुनहुँ तारन तरण जी॥

जाचूँ नहीं सुरवास पुनि नर, राज परिजन साथ जी।

बुध जाँचहूँ तुम भक्ति भव-भव दीजिए शिवनाथ जी॥

Close My Cart

Close
Navigation
Categories